देश के विभिन्न हिस्सों में अशुरा-ए-मोहर्रम आज शांति और सदभाव के साथ मनाया जा रहा है। इसी दिन पैगम्बर मोहम्मद के नवासे हजरत इमाम हुसैन और उनके साथी शहीद हुए थे। उन्होंने कर्बला में सच्चाई, पवित्रता और न्याय के लिए अपना जीवन न्यौछावर कर दिया था।
कोविड महामारी को ध्यान में रखते हुए ज्यादातर स्थानों पर पारम्परिक ताजिया जुलूस बडे पैमाने पर नही निकाले जाएंगे, लेकिन कर्बला के शहीदों के सर्वोच्च बलिदान को याद करते हुए मजलिस या धार्मिक बैठके सीमित संख्या में लोगों की उपस्थिति के साथ आयोजित की जाएंगी। इस दौरान कोविड मानकों और दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा।
